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Saturday, 21 September 2019

जो हो गया वो (Jo Ho Gya Wo )

कोई ऐसी बात जो बताई न हो
किसी से,
बता कर तुझे कहता है दिल ये
हिफाज़त से रखना इसे
यहां वहां नुमाइश में ना दिखे,
तो फिर ना बताना ही अच्छा था
गर यही था रिश्ता
तो कच्चा था,
अगर मालूम होता ज़रा भी
आकर आगे इतने
होते हैं हालात हावी 
तो रोक पाते क्या खुद को?
तुम क्या समझाते 
और कैसे समझाते दिल-ए-बेसुध को?
जो हो गया वो
कोई खुदा ना पलट पाए,
उसे हम बंदों से उम्मीद है
कि जिये जाएँ,
जिये जाएँ,
जिये जाएँ।

Sunday, 2 April 2017

जी में आता है कि दास्ताँ सुनाऊँ मैं (Jee Mein Ata Hai Ki Dastan Sunaaun Main)

जी में आता है कि दास्ताँ सुनाऊँ मैं ,
टूटे दिल का अपने मजमा लगाऊं मैं..!
हो सकता है आगे चलकर रिश्ते ना निभाऊँ मैं,
मगर बेगैरत नही जो घर की दीवार गिराऊं मैं...!
रोज़ दिल के टुकड़ों से बात करता हूँ ,
और कैसे कहो दिल बहलाऊँ मैं.....!
नज़र आता है साफ़ दिलासों में मेरे,
हक़ीक़त में कितना झूठा हूँ मैं.....!
है लंबा सफर हौसले भी ज़ख़्मी,
शायद बदन भी नुचवाऊँ मैं.....!
वो मेरा ना बन सका खैर छोडो ,
अपने हमराही का हौसला हूँ मैं....!
खुदा मेरा मेरी सुनता कहाँ है "चारस",
क्यों ना काफिरों को आवाज़ लगाऊँ मैं...!

दैत्य

  दैत्य   झुँझलाहट की कोई ख़ास वजह नहीं सुना सकूँ इतना ख़ास हादसा भी नहीं , नुचवा लिए अब ख़्वाबों के पंख नहीं यहाँ तक कि...