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Saturday, 21 September 2019

जो हो गया वो (Jo Ho Gya Wo )

कोई ऐसी बात जो बताई न हो
किसी से,
बता कर तुझे कहता है दिल ये
हिफाज़त से रखना इसे
यहां वहां नुमाइश में ना दिखे,
तो फिर ना बताना ही अच्छा था
गर यही था रिश्ता
तो कच्चा था,
अगर मालूम होता ज़रा भी
आकर आगे इतने
होते हैं हालात हावी 
तो रोक पाते क्या खुद को?
तुम क्या समझाते 
और कैसे समझाते दिल-ए-बेसुध को?
जो हो गया वो
कोई खुदा ना पलट पाए,
उसे हम बंदों से उम्मीद है
कि जिये जाएँ,
जिये जाएँ,
जिये जाएँ।

Saturday, 15 April 2017

याद दिलाता है शहर का कोना-कोना (yaad Dilata Hai Shehar ka Kona-Kona)


याद दिलाता है शहर का कोना-कोना,
जब होता है उसका ना होना....!

क्या पता वो आ कर चुप करा जाये,
आओ खेलते हैं रोना-रोना.......!

उसने कहा क्या मिलेगा पड़कर प्यार में,
जो फसल काटनी नहीं उसका बीज क्यों बोना...!

समझ लेना ख्वाहिशों का इंतकाल हो चुका है,
भाने लगे रूप जो तन्हाई का सलोना.....!

जब तलक किस्मत की जाग खुले,
तब तलक पड़ जाएगा ज़िन्दगी को सोना....!

दैत्य

  दैत्य   झुँझलाहट की कोई ख़ास वजह नहीं सुना सकूँ इतना ख़ास हादसा भी नहीं , नुचवा लिए अब ख़्वाबों के पंख नहीं यहाँ तक कि...