Showing posts with label truth. Show all posts
Showing posts with label truth. Show all posts

Saturday, 14 September 2019

ज़िम्मेदारी (ZIMMEDARI)

वो जो मर गया खपते -खपते 
कोई बता पाए उसे 
तो दुआ सलाम 
के साथ ये भी बता दे 
कि कर्ज़े आज भी नहीं उतरे,
दीवार मकान की नहीं चढ़ी,
पडोसी आज भी लड़ता है ,
सड़क पर गड्ढा है ,
छुट्टी के दिन भी काम करती है बीवी ,
बाहर खराब है वातावरण 
और राजनीति ,
महंगाई नहीं रुकेगी ,
सस्ताई विचारों में है ,
इंसान पैदा हुए जा रहे हैं ,
जमीन सबको चाहिए ,
पैसा ही पालनहार है ,
पढ़ाई बेकार है ,
शहर में चोरी चकारी है , मारा मारी है ,
गाँव से पलायन जारी है ,
जी कर  कोई नहीं राज़ी ,
सब रोज़ ही मर रहे हैं 
कुछ खुलेआम 
कुछ छुपते - छुपते  ,
वो जो मर गया खपते -खपते 
कोई बता पाए उसे 
तो दुआ सलाम 
के साथ ये भी बता दे
कि 
बच्चे जुट गए हैं ज़िम्मेदारी सँभालने में । 

Sunday, 2 April 2017

जी में आता है कि दास्ताँ सुनाऊँ मैं (Jee Mein Ata Hai Ki Dastan Sunaaun Main)

जी में आता है कि दास्ताँ सुनाऊँ मैं ,
टूटे दिल का अपने मजमा लगाऊं मैं..!
हो सकता है आगे चलकर रिश्ते ना निभाऊँ मैं,
मगर बेगैरत नही जो घर की दीवार गिराऊं मैं...!
रोज़ दिल के टुकड़ों से बात करता हूँ ,
और कैसे कहो दिल बहलाऊँ मैं.....!
नज़र आता है साफ़ दिलासों में मेरे,
हक़ीक़त में कितना झूठा हूँ मैं.....!
है लंबा सफर हौसले भी ज़ख़्मी,
शायद बदन भी नुचवाऊँ मैं.....!
वो मेरा ना बन सका खैर छोडो ,
अपने हमराही का हौसला हूँ मैं....!
खुदा मेरा मेरी सुनता कहाँ है "चारस",
क्यों ना काफिरों को आवाज़ लगाऊँ मैं...!

दैत्य

  दैत्य   झुँझलाहट की कोई ख़ास वजह नहीं सुना सकूँ इतना ख़ास हादसा भी नहीं , नुचवा लिए अब ख़्वाबों के पंख नहीं यहाँ तक कि...